21 December 2017

Bhatia Matrimony

  • My profile-id: GR1686
  • Age/Height: 40 yrs, 5 '7"(170 cms)
  • Religion/Community: Sikh Matrimony
  • Mother Tongue: Punjabi
  • Caste: Bhatia Matrimony
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Brahmin-Sanadya Matrimony

  • My profile-id: GR1838
  • Age/Height: 33 yrs, 5 '11"(180 cms)
  • Religion/Community: Hindu Matrimony
  • Mother Tongue: Hindi
  • Caste: Brahmin-Sanadya Matrimony
  • Location: India » Agra
  • Education: Under Graduate
  • Profession:
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1 November 2017

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31 October 2017

Hindu Brahmin Groom Matrimony

  • My profile-id: GR1139
  • Age/Height: 35 yrs, 5 '5"(165 cms)
  • Religion/Community: Hindu Matrimony
  • Mother Tongue: Hindi
  • Caste: Brahmin Kanyakubja Matrimony
  • Location: India » Hyderabad
  • Education: Bachelors in Arts / Science 

26 October 2017

विवाह में गुणों का मिलान सच या मात्र एक ढकोसला"

विवाह में गुणों का मिलान सच या मात्र एक ढकोसला"
जी हाँ! सही सुना आपने कि " विवाह में गुणों का मिलान सच या मात्र एक ढकोसला " जब भी कोई व्यक्ति अपने बच्चों या किसी के लिये शादी के रिश्ते की बात करने के लिये जाता है तो सबसे पहले तो आप ये पता लगाते हो कि लड़की और लड़के के नाम के अनुसार उनका विवाह बन रहा है या नहीं, अगर बन रहा है तो आप बात को आगे बढ़ाते हुए लड़की या लड़का देखने के लिए जाते हैं औऱ अगर नहीं बनता है तो आप बिना लड़की या लड़के को देखें ही उस रिश्ते के लिये मना कर देते हैं।क्या बात है, क्या मानसिकता है लोगों की, खैर चलिये बात को हम आगे बढाते हैं, चलिये जी जिसने इस रिश्ते को चलाया है उसका फोन दोनों घरों में जाता है कि जी बधाई हो लड़की और लड़के का नाम का मिलान हो गया है वो लोग कल परसों में लड़की या लड़के को देखने के लिए आ रहें हैं, दूसरी तरफ से जी बहुत बड़ियाँ बस अब ये रिश्ता हो जाये,जी समझिये कि हो ही गया,चलिये फिर मिलते हैं।चलिये जी नाम का मिलान तो हो गया है अब हम भी आगे बढ़ते हैं , लड़के के घर लड़की वाले पहुचते हैं और सारी औपचारिकताये पूरी करतें हैं, उसके बाद लड़के वाले लड़की के घर वालों के घर जाते हैं वो वहां की औपचारिकताये पूरी करते हैं, फिर दूसरी मुलाकात में लड़की और लड़के को मिलवा दिया जाता है कि वो दोनो भी एक दूसरे को देख लें समझ लें, लीजिये जनाब अब ये औपचारिकता भी पूरी हो गई।अब हम बात करतें हैं मैन मुद्दे की जी हाँ !मैन मुद्दा अरे वही मुद्दा जिस बारे में मैं आपसे बात कर रही थी , जी हाँ सही समझा आपने गुणों का मिलान। पता नही क्यों जब लोग लड़की और लड़का देख लेते हैं सब पसन्द हो जाता है सब सही लगता है तो ये गुणों का मिलान ,और कुंडली का मिलान क्या मायने रखता है। किसी कुंडली को बनाने के लिए बिल्कुन सही समय की जानकारी होना अति आवश्यक है माना कि आपको उसकी जानकारी है और उसी आधार पर ही आपने अपने बच्चों की कुंडलियाँ बनवायी हैं, पर क्या वो समय बिल्कुन सही हैं क्योंकि जहाँ तक मुझे पता है मैं जानती हूँ कुंडली बनाने में अगर एक सेकंड का भी अंतर हो जाये तो सारी ग्रह दशा बदल जाती है।खैर मैं बात कर रही हूँ गुणों के मिलान की लड़की और लड़के के कितने गुण मिल रहें हैं जितने ज्यादा गुण मिलेंगे उतना ज्यादा अच्छा होगा इनका रिश्ता , इनके वैवाहिक जीवन में उतनी ही ज्यादा खुशियाँ और सुख शांति रहेंगी ,आपको क्या लगता है कि इस बात में कितनी सच्चाई है , जी हाँ सच्चाई आप ऐसे क्यो चौक रहें हैं मैंने तो एक सीधा सा सवाल किया है कि विवाह के लिए जो गुणों का मिलान होता है उसमें कितनी सच्चाई है। इसके पहले आप पढ़ने के लिए आगे बढे उससे पहले एक बार मेरी बात पर गौर करते हुए सोचिये, कोई जवाब मिला शायद कुछ के मन मे कई सवाल हो तो कुछ के मन में कई जवाब । चलिये अब आगे बढ़ते हैं, जितना ज्यादा गुणों का मिलान होगा उतना ही फलित होगा विवाह, क्या बात है ।मेरी समझ मे तो ये बात नही आती है क्योंकि अगर ये बात सच है तो दुनियाँ का हर माँ बाप अपने बच्चों की शादी बहुत ही सोच समझकर, हर बात को जान परखकर ,गुणों के ज्यादा से ज्यादा मिलान कर के ही अपने बच्चों की शादी करतें हैं।फिर क्यों आज हर दूसरे वैवाहिक जीवन में तनाव है क्यों झगड़े हैं, क्यों प्यार कम हो रहा है,क्यों रिश्तों में अलगाव की स्थिति उत्पन्न हो रही है, क्या कभी किसी ने सोचा? उन दोनों के गुण पूरे 36 के 36 मिल गये फिर भी आज वो अलग क्यों हैं?
ऐसा क्या हुआ कि शादी के 3-4महीनों के बाद से ही वो अलग हैं?
जहाँ पूरे 36 गुणों के मिलान के बाद भी आज कहीं रिश्तों में अलगाव की स्थिति है तो कहीं सिर्फ कलह की स्थिति।मुझे तो मात्र ये एक ढोंग एक कोरी औपचारिकता ही लगती है जिसकी बलि चढ़ जाते है लड़के और लड़कियां।जी हाँ क्या है ये गुणों का मिलान और कुंडली का मिलान मन का एक भ्रम ही तो है,जिसे मिटाने के लिए हम बच्चों की जिंदगियों को दांव पर लगा देते हैं सबसे बड़ी बात जो मैं आप सब से बोलना कि एक सुखी वैवाहिक जीवन के लिए जिन गुणों का मिलान होना चाहिए वो मेरी नज़रों में ये हैं-
1- आपसी समझ (एक दूसरे को आप इतना समझने लगो कि बिन बोले आप एक दूसरे की मन की बात समझ लो।)
2- विश्वास ( किसी भी रिश्ते को बनाये रखने के लिए ये सबसे ज्यादा जरूरी है कि दोनों के बीच का विश्वास का रिश्ता बहुत ही मजबूत हो, जो किसी भी प्रकार की बातों पर आकर ना टूटे।)
3- सम्मान ( वैसे तो हर रिश्ते में सम्मान का होना अतिआवश्यक है पर पति और पत्नी के रिश्ते में तो एक दूसरे के लिए सम्मान की भावना अगर हो तो उनका रिश्ता और भी मजबूत हो जाता है, क्योंकि एक पत्नी अपने पति की आँखों में हमेशा ही अपने लिए सम्मान देखना चाहती है।)
4- दिलों का मेल (अगर एक दूसरे का आपस मे दिल मिल गया तो वो सबसे बड़ा मिलान है,उसके समक्ष किसी और चीज़ का मिलाप का तो कोई मोल ही नही है,दिलो का मिलान ही सबसे बड़ा मिलन है।)
5 - प्यार ( प्यार हर मर्ज की दवा है,प्यार में वो जादू है जो पत्थर दिल इंसान को भी पिघला देती है।)
6 - समय ( जी हाँ समय जो आज हर कोई अपनी पत्नी या पति को नही दे पाते हैं, थोड़ा समय एक दूसरे को दीजिये , कुछ अपनी कहिये कुछ उनकी सुनिये।)बस कुछ ऐसी ही छोटी छोटी बातें हैं जो किसी भी रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए काफ़ी हैं, अगर ये गुण आपके मिल गए तो कभी किसी भी आपके रिश्ते में टकराव या अलगाव की स्थिति ही नहीं आएगी ,बाकी गुणों का मिलान और कुंडली का मिलान कोरी मन वहम मात्र है,बस किसी भी रिश्ते की शुरुआत होने से पहले अगर आपके आपस मे ये गुण मिल गए तो समझ लिजियेगा कि आपके रिश्ते का भविष्य काफ़ी सुनहरा है।
आपको क्या लगता है कि मेरे ये विचार सही हैं, जरूर बताएं और साथ में ये भी बताए कि रिस्ते में मजबूती के लिए किन गुणों का मिलान होना आवश्यक है उन 36 गुणों और कुंडली का मिलान होना आवश्यक है या उन गुणों का जो किसी भी रिस्ते के लिए जरूरी है, आपकी नज़रों में ऐसे कौन से गुणों का होना जरूरी है जरूर बताएं।..
शुक्रिया🙏✍️

16 October 2017

MDH Masala Owner Success Story

MDH की प्रेरक कहानी / MDH Masala Owner Success Story In Hindi

महाशिअन दी हात्ती लिमिटेड भारतीय मसालो और मिश्रण के उत्पादक, वितरक और निर्यातक है, जिनका ब्रांड नाम MDH है. खाने में उपर्युक्त बहोत से मसालो के निर्माण में इनका एकाधिकार है, जैसे MDH चना मसाला. कंपनी की स्थापना 1919 में महाशय चुनी लाल ने सियालकोट में एक छोटी दुकान खोलकर की. तभी से वह पुरे देश में बढ रहा है, और कई देशो में भी उनके मसालो का निर्यात किया जा रहा है. उनकी यह संस्था महाशय चुनी लाल चैरिटेबल ट्रस्ट से भी जुडी हुई है.

महाशय धरमपाल गुलाटी का इतिहास – MDH Masala Owner Mahashay Dharampal Gulati History In Hindi :

महाशय धरमपाल गुलाटी का जन्म 27 मार्च 1923 को सियालकोट (पाकिस्तान) में हुआ. उनके पिता महाशय चुन्नीलाल और माता माता चनन देवी लोकोपकारी और धार्मिक थे और साथ ही वे आर्य समाज के अनुयायी भी थे.

1933 में, 5 वि कक्षा की पढाई पुरी होने से पहले ही उन्होंने स्कूल छोड़ दी थी. 1937 में, अपने पिता की सहायता से उन्होंने छोटा व्यापार शुरू किया, बाद में कुछ समय बाद उन्होंने साबुन का व्यवसाय और बाद में उन्होंने कुछ समय तक जॉब किया, फिर कपड़ो के व्यापारी बने, फिर बाद में वे चावल के भी व्यापारी बने. लेकिन इनमे से किसी भी व्यापार में वे लंबे समय तक नही टिक सके. बाद में उन्होंने दोबारा अपने पैतृक व्यवसाय को ही करने की ठानी, जो की मसालो का व्यवसाय था, जिसे देग्गी मिर्च वाले के नाम से जाना जाता था और यह पुरे भारत में प्रचलित था.

देश के विभाजन के बाद, वे भारत वापिस आये और 27 सितम्बर 1947 को दिल्ली पहोचे. उस समय उनके पास केवल 1500 रुपये ही थे, जिनमे से 650 रुपये का उन्होंने टांगा ख़रीदा और न्यू दिल्ली स्टेशन से कुतब रोड और करोल बाग़ से बड़ा हिन्दू राव तक उसे चलाते थे. बाद में उन्होंने छोटे लकड़ी के खोके ख़रीदे जिसकी लंबाई-चौड़ाई लगभग 14 फ़ीट×9 फ़ीट थी और अपने पारिवारिक व्यवसाय को शुरू किया और पुनः महाशिअन दी हात्ती ऑफ़ सियालकोट “देग्गी मिर्च वाले” का नाम रोशन किया.

व्यवसाय में अटूट लगन, साफ़ दृष्टी और पूरी ईमानदारी की बदौलत महाशयजी का व्यवसाय ऊंचाइयों को छूने लगा था. जिसने दुसरो को भी प्रेरीत किया. बहोत कम लोग ही महाशयजी की सफलता के पीछे के कठिन परीश्रम को जानते है, उन्होंने अपने ब्रांड MDH का नाम रोशन करने के लिए काफी महेनत की.

महाशयजी के पास अपनी विशाल सफलता का कोई रहस्य नही है. उन्होंने तो बस व्यवसाय में बनाये गए नियमो और कानूनों का पालन किया और आगे बढ़ते गए, व्यवसाय को आगे बढाने के लिए उनके अनुसार ग्राहकों को अच्छी से अच्छी सेवा के साथ ही अच्छे से अच्छा उत्पाद मिलना भी जरुरी है. उन्होंने अपने जीवन में अपने व्यवसाय के साथ ही ग्राहकों का भी ध्यान रखा है. मानवता की सेवा करने से वे कतई नही चूकते, वे हमेशा धार्मिक कार्यो के लिये तैयार रहते है.

नवंबर 1975 में 10 पलंगों का एक छोटा सा अस्पताल आर्य समाज, सुभाष नगर, न्यू दिल्ली में शुरू करने के बाद, उन्होंने जनवरी 1984 में अपनी माता चनन देवी की याद में जनकपुरी, दिल्ली में 20 पलंगों का अस्पताल स्थापित किया, जो बाद में विकसित होकर 300 पलंगों का 5 एकर में फैला अस्पताल बना, इस अस्पताल में दुनिया के सारे नामचीन अस्पताल में उपलब्ध सुविधाये मुहैया कराइ जाती है, जैसे की एम्.आर.आई, सी.टी. आई.वि.एफ इत्यादि.

उस समय पश्चिमी दिल्ली में इस तरह की सुविधा से भरा कोई और अस्पताल ना होने की वजह से पश्चिमी दिल्ली के लोगो के लिये ये किसी वरदान से कम नही था. महाशयजी रोज़ अपने अस्पताल को देखने जाया करते थे और अस्पताल में हो रही गतिविधियों पर भी ध्यान रखते थे. उस समय की ही तरह आज भी उस अस्पताल में गरीबो का इलाज़ मुफ़्त में किया जाता है. उन्हें मुफ़्त दवाईया दी जाती है और वार्षिक रुपये भी दिए जाते है.

महाशय धरमपाल बच्चों की भी सहायता करने से नही चुके, कई स्कूलो को स्थापित कर के उन्होंने बच्चों को मुफ़्त में शिक्षा दिलवाई. उनकी उनकी संस्था कई बहुउद्देशीय संस्थाओ से भी जुडी है, जिसमे मुख्य रूप से MDH इंटरनेशनल स्कूल, महाशय चुन्नीलाल सरस्वती शिशु मंदिर, माता लीला वती कन्या विद्यालय, महाशय धरमपाल विद्या मंदिर इत्यादि शामिल है.

उन्होंने अकेले ही 20 से ज्यादा स्कूलो को स्थापित किया, ताकि वे गरीब बच्चों और समाज की सहायता कर सके. रोज वे अपना कुछ समय उन गरीब बच्चों के साथ व्यतीत करते है और बच्चे भी उनसे काफी प्यार करते है. जो इंसान करोडो रुपयो का व्यवसाय करता हो उसे रोज़ उन गरीब बच्चों को समय देता देख निश्चित ही हमें आश्चर्य होंगा.


आज कोई यह सोच भी नही सकता की उनकी बदौलत कितने ही गरीब लड़कियो का विवाह हुआ है और आज वे सुखरूपि अपना जीवन जी रहे है. उनकी इस तरह की सहायता के लिये हमें उनका तहे दिल से शुक्रियादा करना चाहिये.

उन्होंने बहोत सी सामाजिक संस्थाओ से भी उनकी सहायता के लिये बात की है और बहोत सी गरीब लड़कियो का खर्चा उन्ही की संस्था उठाती है. आज अपनी संस्थाओ में पल रहे सभी गरीब बच्चों की जिम्मेदारी महाशय धरमपाल ने ली है, उनकी स्कूल फीस से लेकर किताबो तक और जरुरत की चीजो तक का खर्चा महाशयजी ही देते है, इस बात से उन्होंने कभी इंकार नही किया.

वे धर्मो में भेदभाव किये बिना सभी को समान धर्म की शिक्षा देते है और प्रेमभाव और भाईचारे से रहने की सलाह देते है. उनकी छात्र-छाया में सभी समुदाय के लोग रहते है, जिनमे हिन्दू, मुस्लिम और सिक्ख शामिल है. और सभी धर्मो के त्योहारो को भी मनाते है. वो कोई भी बात जो धर्मो का विभाजन करते है, उन बातो का वे विरोध करते है. शायद, उनकी महानता और उनके पीछे कोई आरोप ना होने का यही एक कारण होंगा.

महाशय धरमपाल का दर्शनशास्त्र यही कहता है की, “दुनिया को वह दे जो आपके पास सबसे बेहतरीन हो, और आपका दिया हुआ बेहतरीन अपने आप वापिस आ जायेगा.”

उनकी द्वारा कही गयी ये बात हमे सच साबित होती हुई दिखाई देती है. आज मसालो की दुनिया का MDH बादशाह कहलाता है. वे सिर्फ मसालो का ही नही बल्कि समाज में अच्छी बातो का भी उत्पादन करते है. उन्होंने कई अस्पतालों, स्कूलो और संस्थाओ की स्थापना अब तक की है. आज देश में बच्चा-बच्चा MDH के नाम से परीचित है.

हमें विश्वास है की महाशयजी का यह योगदान देश के और देश में पल रहे गरीबो के विकास में महत्वपूर्ण साबित होगा. निश्चित ही वे वर्तमान उद्योजको के प्रेरणास्त्रोत होंगे.
निश्चित ही महाशयजी इस सम्मान के काबिल है, उनके इस योगदान का हमे सम्मान करना चाहिये.


reputation

English Quotes:- It takes 20 years to build a reputation and five minutes to ruin it. If you think about that, you’ll do things differently.

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Hindi Quote:- साख बनाने में बीस साल लगते हैं और उसे गंवाने में बस पांच मिनट, अगर आप इस बारे में सोचेंगे तो आप चीजें अलग तरह से करेंगे।

12 October 2017

RishtaPao.com

My profile-id
: GR1393
Age/Height
: 21-9-1996, 5 '0"(152 cms)
Religion
: Hindu Matrimony
Mother Tongue
: Hindi
Caste
: Dheevara Matrimony
Location
: Faridabad »India
Education
: N/A
College/Institute
: gpw sec-8 faridabad
Gender
: female

Marriage Proposasls

My profile-id
: GR1473
Age/Height
: 24-6-1992, 5 '5"(165 cms)
Religion
: Hindu Matrimony
Mother Tongue
: Hindi
Caste
: Jatav Matrimony
Location
: Saharanpur »India
Education
: Bachelors in Arts / Science / Commerce
College/Institute
: Guru nanak inter college
Gender
: female
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नाभि पर तेल लगाकर सोने के हैं फ़ायदे अनेक

नाभि पर तेल लगाकर सोने के हैं फ़ायदे अनेक
पुराने समय के कई नुस्खे हैं जो आपके लिए बेहद फ़ायदेमंद हैं इन्हीं में से एक है नाभि पर तेल लगाना। जी हां नाभि पर तेल लगाना एक मैजिकल फ़ॉर्मूला है ये आपकी हेल्थ और ब्यूटी दोनों को ही हेल्दी रखता है। इसके लिए आपको रात में सोने से पहले सिर्फ़ ये काम करना है और हफ्ते भर में आप अपनी स्किन और बॉडी पर मैजिकल इफैक्ट को महसूस कर पाएंगे। पुराने समय के कई नुस्खे हैं जो आपके लिए बेहद फ़ायदेमंद हैं इन्हीं में से एक है नाभि पर तेल लगाना। जी हां नाभि पर तेल लगाना एक मैजिकल फ़ॉर्मूला है ये आपकी हेल्थ और ब्यूटी दोनों को ही हेल्दी रखता है। इसके लिए आपको रात में सोने से पहले सिर्फ़ ये काम करना है और हफ्ते भर में आप अपनी स्किन और बॉडी पर मैजिकल इफैक्ट को महसूस कर पाएंगे। और आप धीरे-धीरे जवान दिखने लगेंगे। शरीर की छोटी-छोटी बीमारियां खत्म हो जाती हैं और आप बिल्कुल स्वस्थ रहेंगे।
Image result for नाभि पर तेल

25 September 2017

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19 September 2017

घर में शंख रखने और बजाने के फायदे जानिए

हमारे देश में मंदिरो में पूजा-पाठ के दौरान शंख बजाना काफी पुराने समय से चलता आ रहा है. देश के कई भागों में लोग शंख को पूजाघर में रखते हैं और इसे नियम‍ित रूप से बजाकर मंदिरो में पूजा करे है. ऐसे में यह जानना बड़ा दिलचस्ब हो जाता हे कि शंख केवल पूजा-अर्चना में ही उपयोगी है या इसका सीधे तौर पर कुछ लाभ भी है.

तो चलिए जानते हे घर में शंख रखने और इसको बजाने के फायदे..

1. ऐसा कहा जाता हे की जिस घर में शंख पाया जाता है, वहां माँ लक्ष्मी विराजमान रहती है.

2. शंख को इसलिए भी सही माना गया है, क्योंकि लक्ष्मी माँ और विष्णु ईश्वर, अपने हाथों में इसे रखते हैं.

3. पूजा-पाठ में शंख बजाने से वातावरण सुध हो जाता है. जहां तक इसकी ध्वनि जाती है.

4. शंख के जल से श‍िव, लक्ष्मी आदि का अभि‍षेक करने से ईश्वर प्रसन्न होते हैं
5. ब्रह्मवैवर्त पुराण में कहा गया है कि शंख में जल रखने और इसे छ‍िड़कने से वातावरण शुद्ध होता है.

6. शंख की आवाज लोगों को पूजा-अर्चना के लिए प्रेरित करती है.

7. वैज्ञानिकों का मानना है कि शंख की आवाज से वातावरण में मौजूद कई तरह के जीवाणुओं-कीटाणुओं का नाश हो जाता है.

8. शंख बजाने से फेफड़े का व्यायाम होता है. 

"दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई" आखिर क्यों बनाई भगवान् ने दुनिया?

सारि दुनिया के लोग जब कभी अकेले में अपने मन या आत्मा से बातें करते है तो उनके भीतर ये सवाल उठता होगा की जब सबको एक दिन मरना ही है, तो फिर ऊपर वाले ने दुनिया बनाई ही क्यों है? इससे अच्छा तो वो पैदा ही न हो, अगर आपके भी मन में ये सवाल पैदा हुआ है तो आज जाने उसका संभव प्रयास में जवाब.

भारतीय पौराणिक इतिहास दुनिया में सबसे पुराने समय के होने का दावा करता है जो की कमोबेश सही भी है, तो वो क्या कहता है इस सवाल के बारे में? इसके अनुसार एक समय था जब धरती पर केवल जल था और सिर्फ त्रिदेवो (ब्रह्मा विष्णु महेश) का ही अस्तित्व था जिनका न कोई आदि ही है और न ही अंत.तब एक दिन भगवान् विष्णु शेष शय्या पे सोये हुए थे तब उनकी कान की किट्टी(कचरा) से दो भयंकर असुर पैदा हुए जिनका नाम मधु और कैटभ था. अपने प्रकट होते ही भगवान की नाभि से निकले कमल में बैठे ब्रह्मा जी की और बढ़े, ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु की पलकों वक्ष और बाँहो में समाहित योगनिंद्र का पहली बात ध्यान किया.

उनके प्रकट होते ही भगवान विष्णु की निंद्रा खुल गई और उन्होंने ब्रह्मा जी को बचाने के लिए उनसे युद्ध आरम्भ कर दिया, लेकिन 5000 साल तक उनसे द्वन्द करने पर भी वो उन्हें पराजित न कर सके. लेकिन ब्रह्मा जी के कहने पर योगमाया ने उनकी बुद्धि फेरी और उन दो दानवो मधु और कैटभ ने विष्णु के युद्ध से खुश होके वरदान मांगने बोला.
उन्होंने ये शर्त रखी जन्हा धरती जल में न डूबी हो वंही हमारी मृत्यु हो इतना कहना था की भगवान विष्णु ने दोनों का सर अपनी जंघा पे रखा और सुदर्शन से काट दिए. ये दोनों दानव कुछ और नहीं बल्कि भगवान् के मन के विकार थे जिनकी शक्ति देख वो भी चिंता में आ गए.

सम्भवतः इस कारण ही उन्होंने ऐसी घटना की पुनरावृति रोकने के लिए ब्रह्मा जी को श्रिष्टि की रचना आरम्भ करने के लिए कहा था. इस हेतु भगवान् ने अपने ही असंख्यों अंश क्र लिए जिन्हे हम आत्मा कहते है, इस हिसाब से हम भगवान् का ही अंश है और भगवान् ने हमें अपने मन के विकारों को कम करने के लिए धरती पर भेज है.भगवान् अपनी तरह से हर प्रयास करते है की हम इसी की चेस्टा करें लेकिन भगवान् ने ही जब अपने शारीर के अंश किये और पहली दफा औरत और मर्द बनाए तो वो तुरंत भगवान में फिर समाहित हो गए. तब योगमाया की सहायता से उन अंशों को मोहमाया में डाला गया और दोनों के मिलन से श्रष्टि चक्र बढ़ा.

अब ये हम पे निर्भर करता है की हम इस संसार चक्र में दुःख भोगना चाहते है ये परमात्मा में विलीन होके अमर होना, क्योंकि ऐसा करने पर न हमें मृत्यु का भय ही रहेगा और न ही प्रलय में हम विचलित होंगे.

इसलिए जरुरी हे सिर को ढकाना पूजा के समय जानिये क्यों ?

कहा जाता हे की इंसान का सबसे नाजुक और सेंसिटिव अंग मनुष्य का सिर होता है। इसी लिए ये अक्सर देखा जा सकता हे की किसी भी धर्म से जुडी स्त्रियां पूजा पाठ करते समय अपने सिर पे दुपट्टा या साड़ी के पल्लू को हमेशा डाले रखती हैं। बड़ो के सामने सिर पे दुपट्टा या साड़ी के पल्लू को ढंककर रखना सम्मान सूचक भी माना जाता है।

जानिए वैज्ञानिक कारण क्या है 

ब्रह्मरंध्र सिर के बीचों-बीच स्थित होता है। मौसम का मामूली से परिवर्तन के दुष्प्रभाव ब्रह्मरंध्र के भाग से शरीर के अन्य अंगों में आतें हैं। इसके अलावा आकाशीय विद्युतीय तरंगे खुले सिर वाले व्यक्तियों के अंदर घुस कर गुस्सा, दिमागी परेसानी, नज़रे कमजोर होना जैसे कई बीमारियो पैदा करती है। सिर के बालों में रोग फैलाने वाले कीटाणु आसानी से प्रवेश कर जाते हैं, क्योंकि बालों में कुछ ऐसा होता हे जिससे वो आसनी से उस जगह को नही छोड़ते । रोग फैलाने वाले यह कीटाणु बालों से शरीर के भीतर प्रवेश कर जाते हैं। जिससे व्यक्ति रोगी को रोगी बनाते हैं। इसी कारण सिर और बालों को जहां तक हो सके सिर और बालों को ढककर रखना हमारी परंपरा में शामिल है। साफ , पगड़ी और अन्य साधनों से सिर ढंकने पर कान भी ढंक जाते हैं। जिससे ठंडी और गर्म हवा कान के द्वारा शरीर में प्रवेश नहीं कर पाती। कई रोगों का इससे बचाव हो जाता है।

सिर ढंकने से आज का जो सबसे गंभीर बीमारी है गनजा हो जाना, बालो का टूटना और खोरा जैसे रोगो से आसानी से बचा जा सकता है। आज भी हिंदू धर्म में परिवार में किसी की मृत्यु पर उसके संबंधियों का मुंडन किया जाता है। ताकि मृतक शरीर से निकलने वाले रोगाणु जो उनके बालों में चिपके रहते हैं। वह नष्ट हो जाए। स्त्रियां बालों को पल्लू से ढंके रहती है। इसलिए वह रोगाणु से बच पाती है। नवजात शिशु का भी पहले ही वर्ष में इसलिए मुंडन किया जाता है ताकि गर्भ के अंदर की जो गंदगी उसके बालों में चिपकी है वह निकल जाए। मुंडन की यह प्रक्रिया अलग-अलग धर्मों में किसी न किसी रूप में है।

15 September 2017

matrimony

“It’s probably not just by chance that I’m alone. It would be very hard for a man to live with me, unless he’s terribly strong. And if he’s stronger than I, I’m the one who can’t live with him. … I’m neither smart nor stupid, but I don’t think I’m a run-of-the-mill person. I’ve been in business without being a businesswoman, I’ve loved without being a woman made only for love. The two men I’ve loved, I think, will remember me, on earth or in heaven, because men always remember a woman who caused them concern and uneasiness. I’ve done my best, in regard to people and to life, without precepts, but with a taste for justice.” 

7 September 2017

2 September 2017

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Benefits of Ginger powder

Most herbal medicines that you'll find in the market will have a hint of ginger powder in it. For centuries, Ayurveda has used ginger root for everything- form treating digestive issues to headaches, but only recently scientists have been able to recognize its clinical and medicinal properties. Dry ginger powder is widely used in the kitchen to add flavor and aroma. Dry Ginger powder is also known as Sonth in Hindi, Sonti in Telugu, Soonth in Gujarati, Suntha in Marathi and Shunti in Kannada. The powder is extracted from the ginger root which is dried. It is a fine off-white or slightly brownish powder that has a strong aroma and a pungent flavour. Easy to store, ginger powder has a long shelf life of about one year. If you didn't know about the many benefits of using ginger powder, "Ginger powder has various benefits, especially in Ayurvedic healing. It has anti-inflammatory properties that help improve digestion. It is an exceptional natural medicine used for treating common cold. It has anti-bacterial properties too that help prevent any infections in the body." Here are six amazing health benefits of ginger powder worth knowing-

1. Improves Metabolism


Dry ginger powder contains thermogenic agents that are useful to burn fat. Regular consumption of ginger powder may actually help in boosting your metabolism and burning off the excess fat further helping you lose weight.

stomachDry ginger powder contains thermogenic agents that are useful to burn fat​

2. Relieves Upset Stomach


An upset stomach can be annoying and painful at the same time. Ginger has anti-inflammatory properties that help the stomach to neutralize the digestive juices and further stimulates food digestion and absorption, eliminating the excess gas from intestinal tracts.

3. Perfect Aid for Common Cold


The anti-inflammatory gingerols and shaogals present in ginger root help relieve common cold. Consuming it with lukewarm water can have immediate effects on cold and flu. You can also mix ginger powder, clove powder and salt and consume it twice a day for relief.

coldThe anti-inflammatory gingerols and shaogals present in ginger root help relieve common cold​

4. Cure for Motion Sickness or Morning Sickness
Ginger powder is an easy solution for motion sickness and morning sickness in pregnant women. Ginger powder mixed with water is highly effective in preventing nausea. It soothes the stomach and gives relief from inflammation.

5. Beauty Benefits of Ginger powder


Did you know ginger powder is used in various face packs to prevent acne and pimples? Its anti-inflammatory properties and anti-bacterial properties help to unclog pores and kill acne-causing bacteria. All you need to do is to mix milk and ginger powder and make a smooth paste. Apply it on your face and leave it for about 15-20 minutes. This mask will rejuvenate your skin leaving you with a fresh and youthful glow. You can also make a toner with ginger powder. Boil two teaspoons of ginger powder in four cups of water. Add a few drops of rosemary or lavender essential oil and mix it well. Store it in a glass bottle and refrigerate. It keeps your skin hydrated and reduces dryness.


6. Culinary Benefits of Ginger Powder
Dried ginger powder is commonly used in spices and masalas, curries and stews. Other than adding flavor, adding a pinch of this spice in rajma and chhole masala can help prevent excess gas in the stomach.
A cup of masala chai is great for common cold or a sore throat. Mix cinnamon, cardamom, cloves, fennel and ginger powder to make a hot cup of tea.
Dried ginger powder is used to add flavour to ginger candies that help in treating flatulence.

This humble kitchen ingredient has a lot to offer and so, you must make the most of it.

20 August 2017

पराया घर


शादी के तीसरे दिन ही बीएड का इम्तेहान देने जाना था उसे। रात भर ठीक से सो भी नहीं पायी थी। किताब के पन्नों को पलटते हुए कब भोर हुई पता भी नहीं चला। हल्का उजाला हुआ तो रितु जगाने के लिए आ गयी। बहुत मेहमान थे, तो सबके जागने से पहले ही दुल्हन नहा ले। नहीं तो फिर आंगन में भीड़ बढ़ जाएगी। सबके सामने सब गीले बाल, सिर पर पल्लू लिए बिना थोड़े निकलेगी। नहा कर रूम मे बैठ कर फिर किताब में खो गयी। मुँह-दिखाई के लिए दो-चार औरतें आयी थी। सब मुँह देख कर हाथों में मुड़े-तुड़े कुछ पचास के नोट और सिक्के दे कर बैठ गयी ओसारा पर।
घड़ी में देखा तो साढ़े आठ बज़ रहे थे। नौ बजे निकलना था। तैयार होने के लिए आईने के सामने साड़ी ले कर खड़ी हो गयी। चार-पाँच बार बांधने की कोशिश की मगर ऊपर-नीचे होते हुए वो बंध न पाया। साड़ी पकड़ कर रुआंसी सी हो कर बैठ गयी। "अम्मा को बोला था शादी नहीं करो मेरी अभी। इम्तेहान दे देने दो। मेरा साल बर्बाद हो जायेगा मगर मेरी एक न सुनी। नौकरी वाला दूल्हा मिला नहीं की बोझ समझ कर मुझे भेज दिया। " आंसू पोछतें हुए बुदबुदा रही थी।
"तैयार नहीं हुई। बाहर गाड़ी आ गयी है। जल्दी करो न।" दूल्हे मियां कमरे में आते हुए बोले। वो चुप-चाप बिना कुछ बोले साड़ी लपेटने लगी। इतने में पीछे से सासु माँ कमरे में कुछ लेने आयी। दुल्हिन को यूँ साड़ी लिए खड़ी देख कर माज़रा समझ में आ गया। वो कमरे से बाहर आ कर रितु को आवाज़ लगा कर कुछ लाने को बोली।
"दुल्हिन सुना ई पहिन कर जा परीछा देने। माथा पर ओढ़नी रख लिया। कुछो न होइ। आ जे लोग कुछो बोली त कल जब तू मास्टरनी बन जएबा त सब के मुँह अपने बंद हो जाई।" अपनी बेटी वाला सूट-सलवार पुतौह को देते हुए बोली। उसने भीगी नज़रों से सास को देखा।
सासु माँ सिर पर हाथ फेरते हुए कमरे से निकल गयी। पीछे से आईने में मुस्कुराते हुए दूल्हे मियाँ अपनी दुल्हन को देखने लगे....

18 August 2017

पराया घर

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पराया घर 
शादी के तीसरे दिन ही बीएड का इम्तेहान देने जाना था उसे। रात भर ठीक से सो भी नहीं पायी थी। किताब के पन्नों को पलटते हुए कब भोर हुई पता भी नहीं चला। हल्का उजाला हुआ तो रितु जगाने के लिए आ गयी। बहुत मेहमान थे, तो सबके जागने से पहले ही दुल्हन नहा ले। नहीं तो फिर आंगन में भीड़ बढ़ जाएगी। सबके सामने सब गीले बाल, सिर पर पल्लू लिए बिना थोड़े निकलेगी। नहा कर रूम मे बैठ कर फिर किताब में खो गयी। मुँह-दिखाई के लिए दो-चार औरतें आयी थी। सब मुँह देख कर हाथों में मुड़े-तुड़े कुछ पचास के नोट और सिक्के दे कर बैठ गयी ओसारा पर।
घड़ी में देखा तो साढ़े आठ बज़ रहे थे। नौ बजे निकलना था। तैयार होने के लिए आईने के सामने साड़ी ले कर खड़ी हो गयी। चार-पाँच बार बांधने की कोशिश की मगर ऊपर-नीचे होते हुए वो बंध न पाया। साड़ी पकड़ कर रुआंसी सी हो कर बैठ गयी। "अम्मा को बोला था शादी नहीं करो मेरी अभी। इम्तेहान दे देने दो। मेरा साल बर्बाद हो जायेगा मगर मेरी एक न सुनी। नौकरी वाला दूल्हा मिला नहीं की बोझ समझ कर मुझे भेज दिया। " आंसू पोछतें हुए बुदबुदा रही थी।
"तैयार नहीं हुई। बाहर गाड़ी आ गयी है। जल्दी करो न।" दूल्हे मियां कमरे में आते हुए बोले। वो चुप-चाप बिना कुछ बोले साड़ी लपेटने लगी। इतने में पीछे से सासु माँ कमरे में कुछ लेने आयी। दुल्हिन को यूँ साड़ी लिए खड़ी देख कर माज़रा समझ में आ गया। वो कमरे से बाहर आ कर रितु को आवाज़ लगा कर कुछ लाने को बोली।
"दुल्हिन सुना ई पहिन कर जा परीछा देने। माथा पर ओढ़नी रख लिया। कुछो न होइ। आ जे लोग कुछो बोली त कल जब तू मास्टरनी बन जएबा त सब के मुँह अपने बंद हो जाई।" अपनी बेटी वाला सूट-सलवार पुतौह को देते हुए बोली। उसने भीगी नज़रों से सास को देखा।
सासु माँ सिर पर हाथ फेरते हुए कमरे से निकल गयी। पीछे से आईने में मुस्कुराते हुए दूल्हे मियाँ अपनी दुल्हन को देखने लगे।

4 August 2017

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एक औरत को आखिर क्या चाहिए होता है?

राजा हर्षवर्धन युद्ध में हार गए।
हथकड़ियों में जीते हुए पड़ोसी राजा के सम्मुख पेश किए गए। पड़ोसी देश का राजा अपनी जीत से प्रसन्न था और उसने हर्षवर्धन के सम्मुख एक प्रस्ताव रखा...
यदि तुम एक प्रश्न का जवाब हमें लाकर दे दोगे तो हम तुम्हारा राज्य लौटा देंगे, अन्यथा उम्र कैद के लिए तैयार रहें।

प्रश्न है.. एक स्त्री को सचमुच क्या चाहिए होता है ?
इसके लिए तुम्हारे पास एक महीने का समय है हर्षवर्धन ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया..

वे जगह जगह जाकर विदुषियों, विद्वानों और तमाम घरेलू स्त्रियों से लेकर नृत्यांगनाओं, वेश्याओं, दासियों और रानियों, साध्वी सब से मिले और जानना चाहा कि एक स्त्री को सचमुच क्या चाहिए होता है ? किसी ने सोना, किसी ने चाँदी, किसी ने हीरे जवाहरात, किसी ने प्रेम-प्यार, किसी ने बेटा-पति-पिता और परिवार तो किसी ने राजपाट और संन्यास की बातें कीं, मगर हर्षवर्धन को सन्तोष न हुआ।
महीना बीतने को आया और हर्षवर्धन को कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला..
किसी ने सुझाया कि दूर देश में एक जादूगरनी रहती है, उसके पास हर चीज का जवाब होता है शायद उसके पास इस प्रश्न का भी जवाब हो..
हर्षवर्धन अपने मित्र सिद्धराज के साथ जादूगरनी के पास गए और अपना प्रश्न दोहराया।

जादूगरनी ने हर्षवर्धन के मित्र की ओर देखते हुए कहा.. मैं आपको सही उत्तर बताऊंगी परंतु इसके एवज में आपके मित्र को मुझसे शादी करनी होगी ।
जादूगरनी बुढ़िया तो थी ही, बेहद बदसूरत थी, उसके बदबूदार पोपले मुंह से एक सड़ा दाँत झलका जब उसने अपनी कुटिल मुस्कुराहट हर्षवर्धन की ओर फेंकी ।
हर्षवर्धन ने अपने मित्र को परेशानी में नहीं डालने की खातिर मना कर दिया, सिद्धराज ने एक बात नहीं सुनी और अपने मित्र के जीवन की खातिर जादूगरनी से विवाह को तैयार हो गया

तब जादूगरनी ने उत्तर बताया..
"स्त्रियाँ, स्वयं निर्णय लेने में आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं | "
यह उत्तर हर्षवर्धन को कुछ जमा, पड़ोसी राज्य के राजा ने भी इसे स्वीकार कर लिया और उसने हर्षवर्धन को उसका राज्य लौटा दिया
इधर जादूगरनी से सिद्धराज का विवाह हो गया, जादूगरनी ने मधुरात्रि को अपने पति से कहा..

चूंकि तुम्हारा हृदय पवित्र है और अपने मित्र के लिए तुमने कुरबानी दी है अतः मैं चौबीस घंटों में बारह घंटे तो रूपसी के रूप में रहूंगी और बाकी के बारह घंटे अपने सही रूप में, बताओ तुम्हें क्या पसंद है ?

सिद्धराज ने कहा.. प्रिये, यह निर्णय तुम्हें ही करना है, मैंने तुम्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया है, और तुम्हारा हर रूप मुझे पसंद है ।

जादूगरनी यह सुनते ही रूपसी बन गई, उसने कहा.. चूंकि तुमने निर्णय मुझ पर छोड़ दिया है तो मैं अब हमेशा इसी रूप में रहूंगी, दरअसल मेरा असली रूप ही यही है।
बदसूरत बुढ़िया का रूप तो मैंने अपने आसपास से दुनिया के कुटिल लोगों को दूर करने के लिए धरा हुआ था ।

अर्थात, सामाजिक व्यवस्था ने औरत को परतंत्र बना दिया है, पर मानसिक रूप से कोई भी महिला परतंत्र नहीं है।

इसीलिए जो लोग पत्नी को घर की मालकिन बना देते हैं, वे अक्सर सुखी देखे जाते हैं। आप उसे मालकिन भले ही न बनाएं, पर उसकी ज़िन्दगी के एक हिस्से को मुक्त कर दें। उसे उस हिस्से से जुड़े निर्णय स्वयं लेने दें।

Feetured Post

ये है सनातन धर्म के संस्कार

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